

लेखक, व्यंग्यकार, पत्रकार, कुशल एवं प्रखर वक्ता, अनेक मंचों से सफल संचालन,
क्रांतिकारी संत तरुणसागर के सानिध्य में अनेक प्रवचन माला का संचालन, लब्ध
प्रतिष्ठित दैनिक नईदुनिया, दैनिक भास्कार से पत्रकारिता से वर्षों से जुड़े।
रसायनशाख में स्नातकोत्तर, लेकिन हिंदी पर उतना ही अधिकार म.प्र. एवं छत्तीसगढ़
(अविभाजित म.प्र.) के करीब साढ़े तीन हजार प्रोफेसर के नियमितीकरण से आंदोलन के
संस्थापक अध्यक्ष। आंदोलन की सफलता से नियमितीकरण की कार्रवाही म.प्र.
विधानसभा में हुई।
अ.भा. भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के एडिटोरियल बोर्ड के मेंबर के रूप में कार्य ।
एनीमल वेलफेयर बोर्ड, चैन्नाई के स्पोकपर्सन के रूप में कार्य।
बड़नगर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष, भूजल संवर्धन को लेकर लिखी पुस्तक “जीना है तो
जल को रखो' का संपादन। बड़नगर को केंद्रित पुस्तक 'बड़नगर दर्शन' का संपादन।
देशभर के विभिन्न समाचार पत्रों, दैनिक ट्रिब्यून, जनसंदेश टाइम्स, जनवाणी, हरिभूमि,
नईदुनिया, सुबह सबेरे आदि लब्ध प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में निरंतर व्यंग्य लेखों का
प्रकाशन।
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